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E-ISSN: 2582-8010     Impact Factor: 9.56

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भारत मे जल संकट एवं जनसंख्या विस्फोट एक भौगोलिक अध्ययन

Author(s) Mahipal Gurjar
Country India
Abstract जल वह प्राकृतिक उपहार है जिसका कोई विकल्प नहीं है। इसीलिए जल को अमृत या जीवन भी कहा गया है। जब जल होता है, तो उसका महत्व समझ में नहीं आता है परन्तु जब जल की कमी अर्थात् जल संकट आता है तो उसकी उपयोगिता का पता चलता है। जल को पानी, नीर या किसी भी नाम से पुकारेें, यह हमारे अस्तित्व का पर्याय है तथा इस तथ्य को हमें भली-भाँति समझना भी चाहिए। पृथ्वी पर जीवन के लिए हवा और पानी दो प्राथमिक चीजंे हैं। इनके अभाव में जीवनयापन संभव नहीं है। मानव अस्तित्व के लिए हवा और पानी प्राथमिक आवश्यकताएं हैं। इनके अभाव में जीवनयापन असम्भव है। बढ़ती जनसंख्या द्वारा प्राकृतिक जल संसाध्नों पर अत्यध्कि बोझ है एवं औद्योगीकरण व मानव के प्रकृति विरुद्ध क्रियाकलापों ने इसे और भी गम्भीर बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 22 मार्च को विश्व जल दिवस घोषित करते हुए शद्ध पानी की किल्लत की तुुलना ‘टाईम बम’ से करते हुए एक बडे़ खतरे के प्रति आगाह किया है। हाइड्रोलॉजी पॉलिसी व अन्य नीतियों के माध्यम से समय रहते इस समस्या का समाधन करना होगा। इस समस्या के समाधन हेतु व्यापक प्रयास न किये गये तो भविष्य में पेयजल समाप्त हो जाएगा तथा मानव जीवन पर गम्भीर संकट उत्पन्न हो जाएगा। सरकार के साथ ही जनसामान्य को इस संकट के विषय में विचार करना होगा तथा प्राकृतिक संसाध्नों के संरक्षण, पोषण एवं पुनर्भरण द्वारा इस संकट को कम करने हेतु प्रयास करना होगा।
Keywords पेय जल, प्रदूषित जल, जल संक्रमण जनित रोग, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, हाइड्रोलॉजी पॉलिसी जल संकट, प्राकृतिक संसाध्न, भारी धतुएं,
Field Arts
Published In Volume 5, Issue 12, December 2024
Published On 2024-12-11
Cite This भारत मे जल संकट एवं जनसंख्या विस्फोट एक भौगोलिक अध्ययन - Mahipal Gurjar - IJLRP Volume 5, Issue 12, December 2024.

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